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“आप” छोड़ चुके फूलका ने बनाया सिख सेवक संगठन, एसजीपीसी को राजनीति से निकालने का ऐलान

लुधियाना: पहले विधायक पद तो हाल ही में 3 जनवरी को आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ चुके एडवोकेट हरविंदर सिंह फूलका ने बुधवार को अपने संगठन का ऐलान कर दिया। उन्होंने इसे सिख सेवक संगठन का नाम दिया है। उन्होंने ऐलान किया कि पंजाब को नशे से और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को राजनीति के चंगुल से निकालना ही उनका मकसद है। इससे पहले उन ही की तरह आम आदमी पार्टी छोड़ चुके एक और नेता सुखपाल खैहरा ने मंगलवार को पंजाबी एकता पार्टी का ऐलान किया था। कुल मिलाकर पंजाब में आने वाले दिनों में एक रोचक माहौल बनने वाला है।
अक्टूबर में पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से दिल्ली से मुलाकात के बाद फूलका ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। तब उन्होंने कहा था कि बरगाड़ी बेअदबी प्रकरण और बहबल कलां गोली कांड में कार्रवाई नहीं होने के चलते वे प्रदेश सरकार से नाराज है। सरकार को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूरा समय दिया, लेकिन उसने कुछ नहीं किया।
फूलका का विधायक पद से इस्तीफा अभी तक मंजूर नहीं हुआ। इसमें विधानसभा के नियम आड़े आ रहे हैं। नियमावली के मुताबिक, इस्तीफे की भाषा बिल्कुल सरल शब्दों में होनी चाहिए। कारणों का उल्लेख नहीं करते हुए इस्तीफे में केवल विधायक द्वारा यही लिखा जाना चाहिए कि वह अपने विधायक पद से इस्तीफा दे रहे हैं। लेकिन, फूलका द्वारा भेजे गए इस्तीफे की भाषा नियम 51 के तहत उचित नहीं है। फूलका ने अपने इस्तीफे में डेढ़ पन्ने का पत्र लिख दिया है। इसके अलावा एक बड़ी बात खुद प्रस्तुत होकर इस्तीफा देना होता है, लेकिन फूलका ने विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा ईमेल से भेजा था।
12 अक्टूबर 2015 को फरीदकोट जिले के गांव बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मामला सामने आया था। इसके चलते सिख संगठनों व संगत ने कोटकपूरा व बरगाड़ी से सटे गांव बहबल कलां में धरना दिया था। इसी धरने के दौरान 14 अक्टूबर 2015 को पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में दो ग्रामीणों की मौत हो गई थी।
उस वक्त कैप्टन अमरिंदर सिंह, अकाली दल की सरकार से इस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने की बात कह रहे थे। लेकिन, जैसे ही वह खुद मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने यह मामला सीबीआई से लेकर रिटायर्ड जज रणजीत सिंह की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन कर दिया। 27 अगस्त 2018 को विधानसभा के सत्र में आयोग की रिपोर्ट पेश की गई। तब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आश्वासन दिया था। रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल, पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। अब एडवोकेट फूलका का कहना है कि बावजूद इसके कार्रवाई नहीं हुई।




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