photo dehej

सारा दहेज़ जो बिटिया रानी व उसके माँ बाप ने पाई पाई जोड़कर बनाया था आज लुधियाना के वुमेन सेल में गल सड़ रहा है – श्रीपाल शर्मा

लुधियाना: शादी से पहले गरीब माँ बाप अपनी बेटी की प्रशंसा करते है कि उनकी बेटी ने सारा दहेज़ खुद अपनी कमाई से बनाया है। हमारी बेटी की 7 हजार रुपए महीने की नौकरी थी और हर महीने दो-दो हजार रुपए बचाकर बेटी ने सारा दहेज़ इकठ्ठा किया।
लेकिन यह सारा दहेज़ जो बिटिया रानी व उसके माँ बाप ने पाई पाई जोड़कर बनाया था आज लुधियाना के वुमेन सेल में गल सड़ रहा है।
माँ बाप व बेटी अब इस झूठ की दुनिया में क्या करें ? जिस लड़के को यह दहेज़ दिया था वही लड़का अपना नहीं बना तो अब इस लोहे की अलमारी, लकड़ी के बेड और सोफे व वाशिंग मशीन का क्या करना।
हमारे झूठे समाज से जिस दिन लड़की माँ बाप के घर से विदा होती है तो किसी को कोई खबर नहीं होती कि यह लड़की जो अपने माँ बाप को छोड़कर जिंदगी भर की कमाई से बनाया हुआ अपना दहेज़ लेकर जिस घर में जा रही है कुछ महीने के बाद ही वो सारे घरवाले ही इसके दुश्मन बन जाएंगे।
आर. टी. आई. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट श्रीपाल शर्मा ने कहा कि लड़की वालों की तरफ से कौड़ी कौड़ी जोड़कर बनाया गया दहेज़ लुधियाना के वुमेन सेल में ऐसे पड़ा है जैसे किसी ने उसे कबाड़ में फेंक दिया होता है। उसे देख कर ऐसा लगता है कि हमारे पढ़े लिखे समाज के लोग, कम पढ़े लिखे नेता व रिश्वत देकर अफसर लगे बाबू लोग भी किसी गरीब के द्वारा दो दो रुपये जोड़कर बनाये गए दहेज को देख कर भी यदि उन्हें दया नहीं आती तो समझो आप नर्क में रह रहे हो।
क्या सरकार का फर्ज नहीं बनता कि किसी भी नागरिक की कोई वस्तु जब पुलिस कस्टडी में आ जाती है उसे सम्भाल कर रखें। लेकिन पंजाब पुलिस वुमेन सेल में पड़े दहेज़ के समान को देखकर लगता है कि पुलिस कितनी लापरवाह है। जिनके दिल में जरा भी रहम नहीं है गरीब कन्या का इकट्ठा किया दहेज़ यहाँ बिना छत के ओस व बरसात में पड़ा है। यदि वुमेन सेल का स्टाफ इतना बेरहम दिल होगा तो शायद यह सेल किसी इन्शान को कभी भी न्याय नहीं दे पाएगा।
अब जमाना बदल गया है मुजरिमों को डंडे से नहीं उन्हें समझा कर सही रास्ता दिखाया जाये। ऐसा लगता है कि जो लोग वुमेन सेल में लड़की व लड़के वालों की काउंसलिंग करते हैं। यहाँ पर पहले वूमेन सेल में काम करने वालो की कॉउंसलिंग की जाये क्योकि जब तक एक इंसान दूसरे इंसान की भावनाओं को नहीं समझेंगा तब तक हम किसी को भी सही निर्णय नहीं दे सकते।
श्रीपाल शर्मा ने आगे कहा कि वुमेन सेल में पड़ा सारा दहेज़ का समान किसी छत वाली जगह के नीचे रखा जाए ताकि फैसला होने पर उन्हें अपना सारा दहेज़ का समान सही सलामत मिल सके। लड़के व लड़की को पुलिस द्वारा समझाना और उसके बाद भी यदि वे नहीं मानते तो यह उनकी किस्मत क्योकि यह किसी के हाथ में नहीं है। लेकिन यह जो दहेज का समान जो वूमेन सेल में पड़ा गल सड़ रहा है इसे सुरक्षित स्थान पर रखना तो हमारे हाथ में है।
इससे साबित होता है कि जिस समाज व देश में हम रह रहे है यहां हर कोई एक दुसरे को धोखा दे रहा है और यह देश व समाज के पतन की निशानी है।




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


× one = 9